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विभाजन की स्मृति एनएसएस हंसराज

विभाजन बहुत ही दर्दनाक व खौफनाक था । विभाजन केवल भूमि पर ही नहीं हुआ था बल्कि लोगों के दिलों का बंटवारा भी हुआ था । सर्वविदित है कि लगभग 4500000 हिंदुओं और सिखों ने पाकिस्तान को छोड़कर भारत में शरण ली थी ,जबकि 6000000 मुसलमानों ने पाकिस्तान को अपना नया घर बनाया था, वहीं कुछ रिपोर्टो के अनुसार लगभग 2000000 लोगों ने विभाजन के दौरान अपनी जाने गवाही थी। क्या विभाजन अंतिम हल था ?क्या उसे रोका नहीं जा सकता था ?क्या विभाजन के दौरान हिंसा को कम नहीं किया जा सकता था? जिसने भारत का विभाजन किया क्या उसे भारतीय मूल का नहीं होना चाहिए था ?

इन सब प्रश्नों पर जो कि आज भी बहस का मुद्दा बने हुए हैं एनएसएस हंसराज ने 26 जनवरी के दिन विभाजन के विषय पर ओपन माइक शैशन आयोजित किया जिसमे विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। और यह कार्यक्रम बहुत ही ज्ञानवर्धक बन गया सभी छात्रों ने अपने -अपने पसंदीदा नेताओं को चुना और उनकी उस समय की राय दी। यह कार्यक्रम ऐसा लग रहा था कि जैसे हम 1947 की संविधान सभा में उपस्थित हो ।समीक्षा दीदी और प्रिया दीदी के मार्गदर्शन पर ,आशुतोष सिह और वंशिका ने इस कार्यक्रम का संचालन किया ।

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