सागर (मध्य प्रदेश) में स्थित डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय जो कि 18 जुलाई 1946 में सेना की एक छावनी में डॉ हरिसिंह गौर द्वारा स्थापित की गई थी, यह विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय के नाम से भी प्रसिद्ध है। फरवरी 1983 में डॉ हरिसिंह गौर जी को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने इसका नाम सागर विश्वविद्यालय की जगह डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय रख दिया था । यह विश्वविद्यालय भारत की प्रथम विश्वविद्यालय है, जिसमें किसी एक व्यक्ति द्वारा सबसे अधिक धन का योगदान दिया गया है ।यह विश्वविद्यालय 2400 एकड़ में फैली हुई है ,जबकि डॉ हरिसिंह गौर ने अपनी पूरी जीवन की संपत्ति इसी को बनाने में खर्च कर दी।
विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया डॉ नीलिमा गुप्ता ने विश्वविद्यालय को फिजिकल मोड में सभी छात्रों के लिए खोलने का आदेश दिया है ।
पीएचडी और पीजी के विद्यार्थियों के लिए 7 फरवरी 2022 दिन सोमवार से खोलने जबकि यूजी विद्यार्थियों के लिए 9 फरवरी 2022 दिन बुधवार से खोलने का आदेश दिया है। डॉ नीलिमा गुप्ता ने कहा है कि विश्वविद्यालय में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस ओ पी )का अनुसरण किया जाएगा।