भारत में सभी स्तरों पर बाल लिंगानुपात के बारे में जागरूकता फैलाने तथा बालिकाओं की सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस (नेशनल गर्ल चाइल्ड डे) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2008 में की गई थी। भारत की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी को शपथ ली थी ,इसलिए इसी दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस के लिए चुना गया था ।
इसी उपलक्ष्य में एनएसएस हंसराज ने राष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन माननीय जितेंद्र कुमार झा को आमंत्रित किया ( निर्भया केस में निर्भया के माता-पिता का प्रतिनिधित्व किया था ) गौरतलब है कि जितेंद्र कुमार झा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र (विशेष) और एलएलबी किया है और 1996 से दिल्ली हाईकोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट में अभ्यास कर रहे हैं ।कार्यक्रम बहुत ही ज्ञानवर्धक रहा और सभी विद्यार्थियों के लिए जागरूक भी किया गया ।जितेंद्र जी की वार्ता का मुख्य उद्देश्य था , कि हम अपने अधिकारों को जाने और अपने कर्तव्यों का पालन करें ।उन्होंने 1978 मैं हुए सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक फैसला "मेनका गांधी बनाम भारत संघ "के फैसले को दोहराते हुए कहा कि ' जीवन का अधिकार तो है किंतु सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है '।अनेक विद्यार्थियों ने सवाल भी पूछे और जवाब से वह प्रोत्साहित नजर आए ।अंत में डॉक्टर रोमिला रावत ने उनका धन्यवाद किया। इस प्रकार राष्ट्रीय बालिका दिवस को बहुत ही उत्साह और खुशी के साथ मनाया गया और आशा की गई कि सभी बालिकाएं अपने अधिकार जल्द पा सकेंगी।