हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए स्वाति एक मिसाल के रूप में उभरी है। स्वाति शर्मा राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ की है। " विश्व व्यापार संगठन " में लीगल अफसर के रूप में इनका चयन हुआ है औऱ अब स्विट्जरलैंड जाएंगी। स्वाति ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही हिंदी माध्यम विद्यालय में की थी। उन्होंने बताया कि वो कभी भी कोई टॉपर विद्यार्थी नही थी। लेकिन कुछ बड़ा करने का जज्बा हमेशा से ही था।
उनके पिता सूरजगढ़ के पंचायत समिति के सीबीओ कार्यालय में जेईएन है। लॉ की पढ़ाई के लिए देहरादून गई। सैकेंड ईयर में थी जब इंटरनेशनल लॉ से पोस्ट ग्रेजुएशन करने का सोच लिया था। और उसे पूरा भी किया। इसके आगे का विचार था की दुनिया के टॉप संस्थानों के साथ काम करूँ।
स्वाति बताती है कि उनके परिवार से कोई भी लॉ का स्टूडेंट नही था। मेरे लिए यह जोखिम भरा विषय था। कॉलेज में अन्य साथियों का बैकग्राउंड लॉ से ही था। किसी के पिता जज थे तो किसी के पिता नामी वकील। उन्हें पूरी गाइडेंस मिल रही थी। उनका कहना है कि मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि मैं हिंदी माध्यम से पढ़ी हुई थी जबकि लॉ की सम्पूर्ण पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में ही होती है।
लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद वेरिक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ रीना पटेल से मुलाकात हुई। इनकी गाइडेंस में लंदन में इंटरनेशनल लॉ में रिसर्च करना शुरू किया। वर्ल्ड ट्रेड इंस्टीट्यूट स्विट्जरलैंड के डायरेक्टर से मुलाकात हुई और उन्होंने मेरी रिसर्च और काम की सराहना की। बेल्जियम में छः माह की ट्रेनिग के बाद WTO ओएमसी में जॉब ऑफर हुई।
स्वाति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती है। साथ ही उनका कहना है कि किसी भी मुकाम तक पहुंचने के लिए पैरेंट्स का साथ होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि मध्यमवर्गीय परिवार में होने से उनके सामने काफी आर्थिक समस्याएं थी , पर पापा ने कभी दिक्कत नही आने दी।
जिस काम को करने में डर लगता है उसको करने का नाम ही साहस है। मुट्ठीभर संकल्पवान लोग , जिंनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं।~ महात्मा गांधी