हंसराज महाविद्यालय में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आज रीडिंग कॉर्नर का उद्घाटन किया गया, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेशनल बुक ट्रस्ट के डायरेक्टर युवराज मलिक जी एवं प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी कि ज्वाइंट डीन ऑफ कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी में।
सुबह 10:00 बजे हंसराज कॉलेज के प्रवेश पर एक रीडिंग कॉर्नर की स्थापना की गई जिसमें पुस्तकों को रखा गया और लाइब्रेरी के सामने भी एक रीडिंग कॉर्नर की स्थापना हुई, उसके पश्चात एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें हंसराज महाविद्यालय की प्राचार्य महोदया डॉक्टर रमा जी और मुख्य अतिथि युवराज मलिक जी और रंजन कुमार त्रिपाठी जी भी उपस्थित थे, प्राचार्य महोदया रमा शर्मा जी ने अपने वक्तव्य में नेशनल बुक ट्रस्ट को धन्यवाद दिया कि वह हंसराज महाविद्यालय में एक बहुत ही सुंदर पहल कर रहे हैं, जिससे कि छात्रों को अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरणा मिलेगी और जो पुस्तकें छात्र पढ़ना चाहते हैं, वह पुस्तकें वहां पर प्रदान कि जाएंगी। फिर रंजन त्रिपाठी जी अपने वक्तव्य में बहुत ही सुंदर तरीके से समझाते हैं, कि एक मनुष्य का सच्चा मित्र पुस्तक होती है और अगर हम अपने जीवन में 10 पृष्ठ रोज पढ़ें, और एक पृष्ठ रोज लिखें तो इससे हमारा आत्म विकास होगा और हमारा बौद्धिक ज्ञान भी बढ़ेगा। युवराज मलिक जी आते हैं और छात्रों के प्रश्न लेते हैं और उन प्रश्नों का बहुत ही स्पष्टता से उत्तर देते हैं और बताते हैं कि आप पुस्तकों के प्रति अपना प्रेम एवं एकाग्रता किस प्रकार बढ़ा सकते हैं, उन्होंने आजकल की पीढ़ी जो कि सोशल मीडिया से बहुत ही प्रभावित हो रही है इस पर भी प्रकाश डाल, उन्होंने यह बताया कि अधिकतर ध्यान जब आप सोशल मीडिया पर व्यर्थ कर देते हैं तो, आपके पास एकाग्रता पुस्तकों के लिए नहीं बन पाती है और उसको को पढ़ने के लिए एकाग्र दिमाग की बहुत आवश्यकता होती है, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई भी छात्र लिखना पसंद करता है तो वह उस छात्र के लिखे गए पुस्तक उपन्यास आदि को प्रकाशित जरूर करेंगे, रीडिंग कॉर्नर एक पहल है जिसको मुकाम तक पहुंचाना छात्रों के ही हाथ में है, छात्रों को प्रेरित किया कि वह रीडिंग कॉर्नर पर आए अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ें, और अगर कोई छात्र अपनी इच्छा से अपनी कोई भी पुस्तक जिसे वह चाहे कि और भी लोग प्रभावित हो और उन्हें प्रेरणा मिले, तो वह उस पुस्तक को रीडिंग कॉर्नर पर डोनेट भी कर सकता है, युवराज जी कहते हैं अगर हर बच्चा महीने में एक पुस्तक भी डोनेट करता है तो भारत की सबसे बड़ी लाइब्रेरी हंसराज में स्थापित हो सकती है जो कि अपने आप में एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
अंत में डॉ. प्रभांशु ओझा जी जो कि इस कार्यक्रम के संचालक थे उन्होंने यह कहा कि सभी को रीडिंग कॉर्नर से पुस्तके पढ़नी चाहिए एवं वहां पुस्तके दान भी करनी चाहिए और अगर विद्यार्थी चाहे तो अपनी पुस्तकें प्रकाशित कराने के लिए हंसराज महाविद्यालय के लिटरेरी सोसायटी में अपना नाम भी दे सकते हैं। हंसराज महाविद्यालय में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा की गई यह पहल आने वाले समय में एक सफल पहल अवश्य साबित होगी।