हंसराज महाविद्यालय सिनर्जी सोसायटी द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें भारत पे के संस्थापक अशनीर ग्रोवर को मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की गई, उसके बाद शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी गई, शास्त्रीय नृत्य लोगों को बहुत ही प्रशंसनीय लगा। संजीव भाटिया जी जो की मुख्य वित्तीय अधिकारी है पीसी ज्वैलर्स में , मैं अपने वक्तव्य में कई प्रकार की प्रोत्साहन जनक बातें कहते हैं जिससे छात्रों को सुनकर एक आत्मविश्वास का अनुभव प्राप्त हुआ। मोहित अरोड़ा स्टैंड अप कॉमेडियन है और उन्हें भी सीनरी सोसायटी द्वारा इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था जब वह मंच पर आए तब उन्होंने हास्य रस का ऐसा रंग सभागार में बिखेरा सभी छात्र अत्यधिक प्रसन्न हुए। इसके पश्चात खानपान की व्यवस्था के लिए 10:15 मिनट का ब्रेक रखा गया और उसके बाद वह मुख्य अतिथि सभा में पधारे जिनकी एक झलक पाने के लिए हंसराज महाविद्यालय में छात्र एवं दर्शक दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक महाविद्यालय से एवं काफी दूरी का रास्ता तय करके आए थे।
अशनीर ग्रोवर भारत पे के फाउंडर है और वह सोनी टीवी पर शार्क टैंक इंडिया रियलिटी शो में शार्क की भूमिका भी निभा चुके, जब उन्होंने सभागार में प्रवेश किया तो पूरा सभागार अधिक उजला लगने लगा और जो छात्र सुबह से उनको मिलने के लिए उत्सुक थे और उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे वह उन्हें मिलकर मानव उल्लास में डूब गए, अशनीर ग्रोवर ने अपने वक्तव्य में बताया कि बिजनेसमैन हो ना यह एक उद्यमी होना काफी बड़ी बात है उसके पीछे कितना परिश्रम लगता है वह भी उन्होंने अपने वक्तव्य में बहुत अच्छे से बताएं, फिर उन्होंने छात्रों से वार्तालाप करना शुरू किया और छात्रों के सभी प्रश्नों का बहुत ही सहनशीलता से उत्तर भी दीया, कई छात्रों ने पूछा कि उनकी प्रेरणा क्या थी और जहर वह किस प्रकार एक सफल व्यावसायिक उद्यम बन पाये, तो उन्होंने बताया कि उनकी इस जीवन का यही लक्ष्य था कि उन्हें मिडिल क्लास नहीं रह जाना है बल्कि उस से ऊपर उठकर कुछ बड़ा कर दिखाना है यही सोच लेकर वह आगे बढ़ते गए और आज देश भर में जाने जाते हैं।
अशनीर ग्रोवर जी ने कहा कि वह शार्प इंडिया के बाद बहुत प्रचलित हो चुके हैं और वह चाहते हैं कि देश उन्हें भूल जाए लोग उन्हें भूले तो इस पर एक छात्रा ने प्रश्न किया कि वह ऐसा क्यों चाहते हैं, तो सुंदर उत्तर देते हुए कहा कि उनका जीवन का लक्ष्य फेमस होना नहीं बल्कि सफल होना था उन्हें फेमस यह प्रचलित होने से प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि एक सफल व्यक्ति होने से पड़ता है। साथ ही साथ में छात्रों को कई प्रकार की बातें बता कर गए जिससे कि वह अपने स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रयास कर सकते हैं।
यह कार्यक्रम सफल रहा या यूं कहे की है कार्यक्रम सफल तो तब भी हो गया था जब इसके लिए 4000 से भी अधिक रजिस्ट्रेशन छात्रों द्वारा किए गए थे, और सैनर्जी सोसाइटी में बहुत ही सुंदर तरीके से व्यवस्थित किया।