sambhavkumar
sambhavkumar

एक भारत हमारी नजर से: राष्ट्र निर्माण में युवा आगे आए ~ डॉ शुक्ला

गत शनिवार एक भारत हमारी नजर से और देवम संस्थान बल्गारिया के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्र एवं राष्ट्र के युवाओं को समर्पित सातवे एपिसोड का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में आयोजक एवम हंसराज महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ सुधांशु शुक्ला , डॉ रश्मि झा , डॉ मोना कौशिक, प्रो.डॉ जितेंद्र पाटिल , यशपाल गुप्ता , एस. एम. श्रीवास्तव ,कवि अवनीश मिश्र आदि प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदी के प्रतिभावान छात्रों को आगे लाना और राष्ट्र एवम हिंदी के ऐसे मोतियों को इकट्ठा करना था। इसी क्रम में हंसराज महाविद्यालय के छात्र दिवेश चंद्र, विकास चौधरी , निखिल श्रीवास्तव , नीतिश कुमार और आयुष ' आवर्त ' एवम दिल्ली विश्वविद्यालय के तमाम छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत रश्मि झा मैम की कविता से शुरू हुई। मैम ने कविता और अपने कोकिल स्वर के माध्यम से युवाओं को आगे आने और राष्ट्र के प्रति सदैव समर्पित रहने का संदेश दिया। जिसके पश्चात हिंदी के प्रेमी एवम बहुमुखी प्रतिभा के धनी एवम प्रज्ञा चक्षु छात्र विकास चौधरी ने स्वाधीनता आंदोलन के महापुरुषों तथा तत्कालीन परिवेश का संक्षिप्त विवरण देते हुए स्वाधीनता संग्राम में महापुरुषों एवं स्वतंत्रता सेनानियों की अतुलनीय भूमिका के संबंध में स्वरचित कविता का पाठ किया।

साथ ही साथ भारतवर्ष में विद्यमान वैविध्य तथा सांस्कृतिक सामाजिक एवं संप्रदाय के धरातल पर व्याप्त भिन्नता के होते हुए भी संपूर्ण विश्व में हमारा राष्ट्र अपनी एकता और अखंडता के साथ तथा एकीकृत होकर अपना अस्तित्व सुनिश्चित करने में सक्षम होने का भी संदेश दिया। एक कविता में इतने संदेश एवम वास्तविकता को स्टिक अर्थ में प्रकट करना एक सच्चे हिंदी प्रेमी में ही हो सकता है।

इसके पश्चात प्रज्ञा चक्षु एवम मुर्धन्य छात्र निखिल श्रीवास्तव ने भी अपनी कविता का लोहा मनवाया। उन्होंने ये साबित किया की हिंदी एक जीवित भाषा है। उसमे लिखने के लिए चक्षु की नही अपितु हृदय की गहराइयों की आवश्यकता होती हैं और वास्तव में ये सत्य भी है। इसके पश्चात वीर रस के कवि दिवेश चंद्र द्विवेदी ने अटल जी से प्रेरित, आजादी अभी अधुरी कविता से समाज की परिस्थितियों को व्यक्त करते हुए , भारत के भावी भविष्य को जागृत करने हेतु गौरवान्वित इतिहास का उल्लेख किया और साथ ही साथ संयोग~ वियोग, पाठ्यक्रम से प्रभावित, नारी नर में समता स्थापित करते हुए ये पंक्ति प्रस्तुत की -
मै घनानंद, तू सुजान है मेरी,
मैं प्रेमी तू पहचान है मेरी|
मै विद्रोही करकश, तू कमान है मेरी,
मैं भक्त हूँ तेरा, तू भगवान है मेरी||
जिसने सभी का दिल जीत लिया।
इसी मेधावी छात्रों की कड़ी में नीतीश कुमार ने अपनी रचना प्रस्तुत की। और याद दिला दिया जब जब भारत पर संकट आया हर एक बच्चा वीर सैनिक पाया। साथ ही अपनी अद्वित्य एवम मां भारती की सच्ची आराधना की परिचायक कविता के माध्यम से 'भारत के सैनिकों का शौर्य और बलिदान जिसे पूरी दुनिया ना भुला सकती है और ना वक्त मिटा सकता है' का संदेश दिया। जिसने सभी के मन में राष्ट्रीयता का भाव उजागर किया। अंत में अपनी श्रृंगार रस की कविताओं हेतु प्रसिद्ध छात्र आयुष ' आवर्त ' ने अपनी रचना का पाठ किया और सम्पूर्ण कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

इसके साथ ही डॉ जितेंद्र पाटिल सर ने सभी छात्रों का धन्यवाद एवम उन्हे आशीर्वाद देते हुए भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्तियों के साथ अपने वक्तव्य की शुरुआत की और ये संदेश दिया कि आज हिंदी पूरे देश में हेतु सेतु का कार्य कर रही है। बस आवश्यकता है इसी प्रकार के राष्ट्र समर्पित कार्यक्रम होते रहे और युवा आगे आते रहे। इसी के साथ डॉ मोना मैम , यशपाल सर एवम श्रीवास्तव सर ने सर्वप्रथम सभी छात्रों को स्नेहाशीष दिया और कहा कि ऐसे ही राष्ट्र प्रेमी छात्रों को देखकर विश्वास होता है राष्ट्र का स्वर्णिम भविष्य इन युवाओं की प्रतीक्षा कर रहा है। और शुक्ला सर का धन्यवाद देते हुआ कहा कि एक सच्चा गुरु वो नही होता जो केवल किताबी ज्ञान दे एक सच्चा गुरु वो होता है जो छात्रों को सही राह थमाए। जिससे राष्ट्र का विकास नए आयामों को छुए।

अंत में शुक्ला सर ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये हमारा सौभाग्य है कि आज भी ऐसे युवा हमारे बीच में है जो राष्ट्र एवम राष्ट्र भाषा की भावना से ओत प्रोत है इससे राष्ट्र के विकास का फलीभूत होना निश्चित है। सर ने आग्रह किया की आगामी कार्यक्रम में पुनः ऐसे ही युवा जुड़े।

संबंधित खबरें

और ख़बरें पढें

ऑपरेशन दुर्गा का शुभारंभ हुआ ?

  • A13 अप्रैल 2017
  • B15 मार्च 2017
  • C15 अगस्त 2017
  • Dकोई नहीं
Congratulations, आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है। फिर से प्रयास करें।
आपका उत्तर गलत है। फिर से प्रयास करें।
आपका उत्तर गलत है। फिर से प्रयास करें।
सहीगलत

नौकरी

और ख़बरें पढें
samsamyiksrijan