हेल्पबॉक्स फॉउण्डेशन
पॉलीथिन की थैलियाँ पर्यावरण के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी हैं और उससे निजात पाना एक बड़ी चुनौती है। इसकी जरूरत 'बडिंग डिज़ाइनर्स' ने भी महसूस की और एक से एक आकर्षक कपड़े के थैले (टोट बैग) कलात्मक रंगों से शराबोर कर दिए। जी हाँ हेल्पबॉक्स फॉउण्डेशन की 'मेरा शहर - मेरी ज़िम्मेदारी' मुहिम के तहत नो-पॉलीथिन भोपाल की कोशिश में कपड़े के थैलों को सुंदर कलात्मक रूप से सजाया 'सर्जना एकेडेमी फ़ॉर डिज़ाइन एंड फ़ाइन आर्ट्स' के बच्चों ने। सीनियर आर्टिस्ट विनय सप्रे के मार्गदर्शन में बडिंग आर्टिस्ट बच्चों ने दो दिवसीय कार्यशाला में पर्यावरण के मोटिफ़ उकेरे। कोशिश बस एक ही थी - प्लास्टिक की पन्नियों का उपयोग बन्द करना।
डीपीएस में पढ़ने वाली श्रीया अग्रवाल का कहना है कि वर्कशॉप में हमे हेल्पबॉक्स के फाउण्डर सुनील अवसरकर द्वारा प्लास्टिक की पन्नियों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया बस तभी से हमने फ़ैसला कर लिया कि पन्नियों का इस्तेमाल अब कभी नहीं करेंगे। बाल भवन की छात्रा नंदिका सूद का कहना था कि भोपाल को स्वस्थ व सुंदर बनाने की पहल में भागीदारी कर बहुत ख़ुशी महसूस हुई। अभी तक तो हम लोग हर चीज़ में पन्नियों का ही इस्तेमाल करते हैं। जो बैग हम के डिज़ाइन किये हैं वो इतने आकर्षक बन पड़े हैं कि कोई पन्नियों का इस्तेमाल भला क्यों करेगा। सुंदर तरिके से बनी इन इको फ्रेंडली डिजाईनर थैलियों को बाजार से सौदा लाने में अच्छा भी महसुस होता है।
कार्यशाला में करीब 20 बच्चों ने भाग लिया जिनके नाम हैं: श्रीया अग्रवाल, नंदिका सूद, विदित साबू, प्रियल रामचंदानी, सय्यद अबान अली, तरुषी लालचंदानी, दिशा बग्गा, लक्षिता राजपूत, निमिषा सैनी, कुबेर रावत, अश्लेषा अग्रवाल, दिशा बग्गा, आन्या मिश्रा, हिमांशी तुलस्यान, ईशान लूथरा, स्रीया विपिन, संजली मेहता और संजिनी मेहता। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए।
हेल्पबॉक्स 9425006574 | सर्जना 8989649700
Sunil Shukla
filmmaker & Director
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