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टैगोर कला केंद्र की प्रस्तुति "होरी हो ब्रजराज" का मंचन मानव संग्रहालय में 16 मार्च को

भोपाल
टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति के रवींद्र नाथ टैगोर विश्व विद्यालय द्वारा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के सहयोग से लोकरंगों में छलकती फाल्गुनी छबियों का sunder ताना-बना "होरी हो ब्रजराज" सजीव होगा संग्रहालय के वीथी संकुल मुक्ताकाश मंच पर 16 मार्च को शाम 6:30 बजे यह दृश्य श्रब्य प्रस्तुति प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना क्षमा मालवीय के निर्देशन में मंचित होगा। इस प्रदर्शन में शहर के 60 से भी ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं

इस रूपक की मूल संकल्पना कवि एवं कथाकार संतोष चौबे ने की है। सुत्रधार होंगे कला समीक्षक विनय उपध्याय। ब्रज और मैनपुरी लोकअंचल में सदियों से प्रचलित होली गीतों का संगीत संयोजन संतोष कौशिक और राजू राव ने किया।
"होरी हो ब्रजराज" परंपरा के खनकते गीत संगीत की रंगमयी प्रेमपगी बौछारों और लोकजीवन के सजीले एहसांसो की दिलचस्प सौगात है।

"होरी हो ब्रजराज" को पहले भी भोपाल तथा अन्य शहरों के कला प्रेमियों ने बेहद सराहा है इस अवसर पर टैगोर कला केंद्र की बहुप्रतिष्ठित सांस्कृतिक पत्रिका रंग संवाद के नवीन अंक का लोकार्पण होगा प्रश्तुति में दर्शकों का प्रवेश निःशुल्क है ।

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