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डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर, (मध्य प्रदेश)

सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक , महान दानवीर ,महान शिक्षाविद, महान कानूनविद डॉ हरिसिंह गौर को मैं नमन करता हूं ,उनका पुण्य स्मरण करता हूं ,और उन्होने शिक्षा में जो योगदान दिया है वह अमित रहेगा , अमर रहेगा ,उसको मैं याद करता हूं । उन्होंने शिक्षा का नया रूप (मॉडल) हमारे सामने ,इस देश के सामने रखा , और वह यह था कि शिक्षा के माध्यम से किसी पिछड़े क्षेत्र का विकास कैसे हो सकता है ? एक मॉडल उन्होंने हमारे सामने प्रस्तुत किया कि बुंदेलखंड का विकास कैसे हो । वह बुंदेलखंड में पले - बड़े और शिक्षा के लिए विदेश भी गए। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति थे , उसके बाद नागपुर विश्वविद्यालय के भी कुलपति रहे। और उसके बाद अपनी जन्मभूमि बुंदेलखंड पहुंचे और वहां उन्होंने सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की । शायद ही ऐसा कोई उदाहरण मिलता हो कि जहां एक व्यक्ति ने अपने जीवन की जितनी भी अर्जित संपत्ति थी ,विश्वविद्यालय की स्थापना में लगा दी ।

हरिसिंह गौर, सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक, शिक्षाशास्त्री, ख्यति प्राप्त विधिवेत्ता, न्यायविद्, समाज सुधारक, साहित्यकार (कवि, उपन्यासकार) तथा महान दानी एवं देशभक्त थे। वह बीसवीं शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मनीषियों में से थे । वे भारतीय संविधान सभा के उपसभापति, साइमन कमीशन के सदस्य तथा रायल सोसायटी फार लिटरेचर के फेलो भी रहे थे।उन्होने कानून शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार, संस्कृति, राष्ट्रीय आंदोलन, संविधान निर्माण आदि में भी योगदान दिया।

उन्होने अपनी गाढ़ी कमाई से 20 लाख रुपये की धनराशि से 18 जुलाई 1946 को अपनी जन्मभूमि सागर में सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की तथा वसीयत द्वारा अपनी निजी सपत्ति से 2 करोड़ रुपये दान भी दिया था। इस विश्वविद्यालय के संस्थापक, उपकुलपति तो थे ही, वे अपने जीवन के आखिरी समय (२५ दिसम्बर १९४९) तक इसके विकास व सहेजने के प्रति संकल्पित रहे । डॉ॰ सर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय एक ऐसा विश्वस्तरीय , अनूठा विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना एक शिक्षाविद् के दान द्वारा की गई थी। उनके मस्तिष्क में जहां बुंदेलखंड के पिछड़ेपन को दूर करना था वही वहां के विद्यार्थियों को श्रेष्ठ शिक्षा मिले इसकी भी उन्हें बहुत चिंता थी, उनके सामने जहां ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज के मॉडल्स थे जो विश्व की श्रेष्ठतम विश्वविद्यालय हैं ।और उसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अंतर विषयों (इंट्रडिसीप्लिनरी सब्जेक्ट )की शुरुआत की। डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय आज भारत में नए आयामों को प्राप्त हो रही है । और जो डॉक्टर गौर का सपना था कि हमें बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा देना हैं वह भी सपना पूर्ण हो रहा है ।शिक्षा जगत के लोगों को डॉक्टर गौर से सबक लेना चाहिए

ऑपरेशन दुर्गा का शुभारंभ हुआ ?

  • A13 अप्रैल 2017
  • B15 मार्च 2017
  • C15 अगस्त 2017
  • Dकोई नहीं
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