बेंगलूरु। शहर की अग्रणी साहित्यिक संस्था शब्द की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को ऑनलाइन आयोजित की गई, जो कविता की गुणवत्तायुक्त प्रस्तुति और विमर्श के मामले में शानदार रही। इस काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि थे हिंदी के मूर्धन्य कवि मदन कश्यप और अध्यक्षता की गज़लकार एवं 'शब्द' के उपाध्यक्ष डॉ प्रेम तन्मय ने। आरंभ में 'शब्द' के अध्यक्ष श्रीनारायण समीर ने समुपस्थितों का स्वागत करते हुए मनुष्य के जीवन में कविता की प्रभावी भूमिका को रेखांकित किया। लोक गीतकार सुनीता सैनी द्वारा सरस्वती वंदना से शुरू काव्य गोष्ठी के संचालन का दायित्व प्रखर कवयित्री डॉ उषारानी राव ने बखूबी निभाया।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि मूर्धन्य कवि मदन कश्यप अस्वस्थ होने के बावजूद कार्यक्रम में पूरे समय तक ऑनलाइन जुड़े रहे। उन्होंने कोरोना के मानव समाज पर पड़े दुष्प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे हिंदी कविता धारा भी प्रभावित हुई है। समकालीन कविता पूर्व कोरोना काल और उत्तर कोरोना काल की कविता के रूप में साफ तौर पर आँकी जाने लगी है। उन्होंने कोरोना पर तीन पंक्तियों की अपनी बेहद अर्थगर्भित कविता सुनाई, जिसे बहुत पसंद किया गया। वह कविता है - वह एक तुम्हारा स्पर्श ही तो था, कि जिससे ईश्वर के होने की अनुभूति होती थी, कोरोना ने मुझे निरीश्वर कर दिया।
डॉ. प्रेम तन्मय ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि आज का समय गद्य कविता का है किंतु ध्यान रहे कि कविता और गद्य में बेहद बारीक अंतर होता है। रचनाकारों को समझना होगा कि गद्य कब कविता बन जाता है और कविता कहाँ कविता बनते-बनते रह जाती है। उन्होंने इस मौके पर अपनी गजल सुनाकर समा बांध दिया।
नए अध्यक्ष डॉ. श्रीनारायण समीर के कार्यकाल के अंतर्गत नव वर्ष की इस पहली ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में गरिमा सक्सेना, सुशील कुमार, कनकलता, पंडित राजगुरु,अचला सिन्हा, स्वर्ण ज्योति, राजेंद्र गुलेच्छा, ज्योति तिवारी, नलिनी पोपट, ब्रजेन्द्र मिश्रा, उदयकुमार सिंह, अंजना चांडक, बिन्दु रायसोनी, विजेन्द्र सैनी, डॉ. उषा श्रीवास्तव, राजेश जिन्दल, श्रीकांत शर्मा, सुनीता सैनी, ज्योति तिवारी, नलिनी पोपट आदि रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर स्वरचित बेहतरीन कविताएं, गीत एवं ग़ज़लों की प्रस्तुति दी। रचनाओं को श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली । अंत में 'शब्द' के कोषाध्यक्ष राजेश जिन्दल ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।