संभव कुमारसुचर्चित मोटिवेशनल स्पीकर और एनएलपी गुरु
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विज्ञान भवन में हंसराज और हिंदी की गूँज

और कैंपस न्यूज़

नई दिल्ली : प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विख्यात विज्ञान भावन, दिल्ली में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आज आगाज़ हुआ। ‘नई दुनिया, नया भारत, नई हिंदी’ विषयक पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का अध्यक्षता पूर्व राज्यपाल ओपी कोहली ने किया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हमारा भारत दो भारत में बंटा है, गाँव और शहर में। इन दोनों के बीच की दूरी को पाटने में हिंदी ही सक्षम है। कार्यक्रम की संयोजिका एवं हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो० रमा ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि आज हम विज्ञान भवन में नई दुनिया, नया भारत, नई हिंदी के लिए एकत्रित हुए हैं। हम अगले दो दिनों तक हिंदी के विभिन्न स्वरुप पर कुल चौदह सत्रों में चिंतन मनन करेंगे। उद्घाटन सत्र में अन्य विद्वत जनो में अश्विनी चौबे मंत्री भारत सरकार, चित्रा मुद्गल पूर्व राज्यपाल गोआ, एडमिरल डी के जोशी पूर्व राज्यपाल अंडोमान-निकोबार, महेन्द्र गोयल, पद्मश्री तोमियो मिजोकामी-जापान, प्रो० मोहन उपस्थित रहे। सत्र का संचालन विजय कुमार मिश्र ने किया।

अन्य सत्रों में कौशल विकास के आयाम और डिजिटल दुनिया और डिजिटल हिंदी पर अपना बात रखने वालों में के जी सुरेश, अनंत विजय, शैलजा सक्सेना, बालेन्दु दाधीच व संजय बघेल थे। 'हिंदी सिनेमा और गीत संगीत का वैश्विक परिदृश्य' पर अपनी बात रखने वालों में तेजेन्द्र शर्मा, कैलाश खेर, मालिनी अवस्थी गायिका, वाणी त्रिपाठी, गायत्री कुमार, संदीप भुतोड़िया, विनीता काम्बिरी व प्रभांशु ओझा। कैलाश खेर ने कहा कि हिंदी के कारण आज मैं दिल्ली भारत से निकल कर वैश्विक बन गया। मालिनी अवस्थी ने हिंदी गीत संगीत पर बात करते हुए कहा कि मातृभाषा आपको संस्कार देती है और हिंदी हमारी मातृभाषा है जहां से संस्कार मिलती है। लंदन से आए तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि हिंदी सिनेमा व संगीत शैलेंद्र व साहिर से आगे निकल के सर से पैर तक आ गया है।

पहले के गाने सुन के सर हिलते हैं जबकि अब के गाने सुन के पैर। 'हिंदी साहित्य इस पार उस पार' विषयक पर प्रो० श्यौराज सिंह, दिव्या माथुर, डाॅ० नंदकिशोर पांडेय, जया वर्मा, अनिल जोशी व आशीष कंधवे ने अपनी बात रखी। 'हिंदी शिक्षण का वैश्विक परिदृश्य' विषयक पर डाॅ० विमलेश कांति वर्मा, प्रो० के एन तिवारी, प्रो० सुरेश ऋतुपर्ण, तोमियो मिजोकामी (जपान), प्रो० देवेन्द्र चौबे, प्रो० सत्यकाम, सफर्मो तोलिबो (रुस), परमजीत राॅय (ओमान), संध्या सिंह थे। संचालन राम प्रकाश द्विवेदी ने किया तो वहीं धन्यवाद ज्ञापन महेन्द्र प्रतापति ने किया। इसके अलावे 'विज्ञापन की दुनिया और हिंदी' विषयक पर प्रो० कुमुद शर्मा, डाॅ० आनंद प्रधान, बी एल गौड़, राकेश दुबे, ममता मंडल, संबव कुमार, अजय कुमार। सत्र का संचालन विनित कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डाॅ० विनय गुप्ता ने किया।

विदित हो कि हंसराज कॉलेज द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में जापान, अमेरिका, इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, बुल्गारिया, न्यूयार्क, आर्मेनिया, फिजी, नेपाल, सूरीनाम, सिंगापुर, गयाना, श्रीलंका, मॉरिशस तथा नार्वे सहित लगभग 20 देशों के प्रतिभागी सम्मिलित हुए हैं। तमाम उपस्थित विद्वान उपरोक्त विषय को केंद्र में रखते हुए अपना वक्तव्य देंगे।