संभव कुमारसुचर्चित मोटिवेशनल स्पीकर और एनएलपी गुरु
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महात्मा गांधी खुद एक कलाकार थे। महात्मा गांधी रचते थे, बनाते थे, सृजन करते थे। चरखा, खादी, नमक उनकी रचनात्मकता को ही दर्शाते है। उन्होंने गुलाम भारत की तस्वीर को मिटाकर एक आजाद भारत की तस्वीर बनाई।

अगर मजदूर बनना है तो शरीर का इस्तेमाल करो, अगर कारीगर बनना है तो शरीर और मन दोनों का इस्तेमाल करो, लेकिन अगर कलाकार बनना है तो आत्मा को भी झोकना पड़ेगा। 77 की उम्र में शरीर और मन साथ नहीं देते है, लेकिन आज भी अमिताभ जी को बॉलीवुड का महानायक कहा जाता है। यह मुकाम उनको इसीलिए मिला है क्योंकि वो अपने काम में अपनी आत्मा को झोंक देते है। अपने मन और शरीर को उपयोग करके क्रिकेट कोई भी सीख सकता है, लेकिन सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी या विराट कोहली बनने के लिए अपने काम में अपनी आत्मा झोकनी पड़ती है।

आप के अन्दर भी आत्मा की गहराई में एक कलाकार सोया हुआ है और आप भी उस कलाकार को जगा सकते है। बस जरुरत है अपने आत्मा की आवाज को पहचानने की।

मन खुद को तीरंदाज समझता रहा बड़े गुमान से।
जबकि हर तीर निकलती थी दिल की कमान से।।